देहरादून: दिल्ली में छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के खिलाफ विभिन्न संगठनों और आम नागरिकों ने आज देहरादून में एक जोरदार और गुस्सैल प्रदर्शन किया। केन्द्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। प्रदर्शन के बाद परेड ग्राउंड से घंटाघर तक एक लंबा मार्च निकाला गया। इसी क्रम में उत्तराखंड इंसानियत मंच, उत्तराखंड महिला मंच, एसएफआई, आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने इस विरोध-प्रदर्शन का पूरा समर्थन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में पुलिस द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज, दमन और लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। प्रदर्शन की शुरुआत में सतीश धौलाखंडी तथा उनके साथियों द्वारा जनगीत गाए गए, जिससे उपस्थित लोगों का उत्साह आसमान छूने लगा और आंदोलन को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का स्वरूप भी मिल गया।
प्रदर्शन में दिल्ली से लौटे एसएफआई के कार्यकर्ताओं का स्वागत किया गया। मुख्य वक्ताओं में उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, एसएफआई उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा, एसएफआई के हिमांशु चौहान, डीएवी के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष लेखराज, उत्तराखंड इंसानियत मंच के त्रिलोचन भट्ट, एडवोकेट पंकज क्षेत्री, आम आदमी पार्टी की उमा सिसोदिया और दिल्ली से लौटे अयाज खान शामिल थे।
उन्होंने अपने संबोधनों में छात्र आंदोलन पर पुलिस के पूर्वनियोजित दमन की कड़ी निंदा की। एसएफआई उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा ने कहा कि दिल्ली पुलिस का यह कदम पूरी तरह कानून के शासन पर हमला था। बिना नेमप्लेट और बिना वर्दी के पुलिसकर्मियों द्वारा छात्रों को पीटना साजिश का हिस्सा था और लोकतांत्रिक व्यवस्था में इससे कोई सहन नहीं किया जा सकता। लेखराज ने भी सरकार पर तीखा वार करते हुए कहा कि जो सरकार छात्रों और बच्चों पर लाठियां बरसाती है, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक जनएकजुटता का आह्वान किया।
प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और शिक्षा, रोजगार तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई। अरमान ने एक प्रेरणादायक रैप गीत प्रस्तुत कर जनता से अन्याय और दमन के खिलाफ जागरूक रहने और संघर्ष में भाग लेने की अपील की। दिल्ली से लौटे मुकुल, कनिका, अर्सलान, सौरभ, अनामिका, इजराइल और समीर ने भी जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम और पुलिस दमन के अनुभव अपने साथियों के साथ साझा किए। प्रदर्शन के समापन पर सभी छात्रों, युवाओं और नागरिकों से 22 जुलाई 2026 को गांधी पार्क, देहरादून में आयोजित होने वाले बड़े विरोध-प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया, ताकि छात्रों पर हुए दमन के खिलाफ लोकतांत्रिक आवाज और मजबूत हो सके।
इस दौरान बृहस्पतिवार को भी देहरादून में प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। आंदोलन अब पूरे उत्तराखंड में फैलने की संभावना दिख रहा है।