- प्रेसवार्ता में भावुक होकर सुनाई आपबीती
- 2003 के मामले की दोबारा सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट कराने की मांग
- डीजीपी को भी सौंपा पत्र
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराने जैनी प्रकरण ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दी हैं। लंबे समय बाद सामने आईं जैनी उर्फ इंदिरा देवड़ी ने शनिवार को देहरादून में प्रेसवार्ता कर अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न और दुष्कर्म के आरोपों को दोहराया। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से न्याय की गुहार लगाते हुए वर्ष 2003 के पूरे प्रकरण की दोबारा सीबीआई जांच कराने और डीएनए परीक्षण की मांग की।
प्रेसवार्ता के दौरान जैनी अपनी आपबीती सुनाते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2003 में जब वह महज 16 साल की थीं, तब उनके साथ दुष्कर्म हुआ था। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और डराया-धमकाया गया। जैनी के मुताबिक, उन्हें गर्ल्स हॉस्टल में रखने की बात कहकर कथित तौर पर मानसिक चिकित्सालय में रखा गया और बाद में दबाव बनाकर देहरादून से बाहर भेज दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन घटनाक्रम के दौरान हरक सिंह रावत उन्हें कई बार मसूरी स्थित मधुबन होटल भी लेकर गए थे। जैनी ने कहा कि वह लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं, लेकिन अब तक उन्हें वह न्याय नहीं मिल पाया है जिसकी उन्हें प्रतीक्षा है।
बेटे को पिता का नाम दिलाने की मांग
जैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से हाल में उनका नाम लिए जाने के बाद उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। अब वह अपने बेटे को उसके पिता का नाम दिलाना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है।
उन्होंने हरक सिंह रावत का डीएनए परीक्षण कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे उनके बेटे के पितृत्व से जुड़े सवालों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण हो सकेगा। साथ ही उन्होंने वर्ष 2003 में सामने आए पूरे मामले की नए सिरे से जांच कराने की मांग उठाई।
डीजीपी को सौंपा पत्र, न्याय नहीं मिलने तक देहरादून में रहने की बात
प्रेसवार्ता के दौरान जैनी ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भी पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने मामले की दोबारा सीबीआई जांच और डीएनए परीक्षण कराने की मांग रखी है।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री से न्याय चाहती हैं। यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह देहरादून छोड़कर नहीं जाएंगी। उनका कहना है कि वह अपने और अपने बेटे के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2003 में तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार के दौरान जैनी प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति में काफी हलचल मचाई थी। उस समय कैबिनेट मंत्री रहे हरक सिंह रावत को विवाद के बीच इस्तीफा देना पड़ा था। करीब 23 साल बाद जैनी के दोबारा सामने आने और पुराने मामले की जांच की मांग उठाने से यह प्रकरण फिर चर्चा में आ गया है।