- खानपुर विधायक ने विपक्ष पर लगाया जनहित और किसानों के मुद्दों पर सहयोग नहीं करने का आरोप
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के इस्तीफे को लेकर बुधवार को असमंजस की स्थिति बन गई। उमेश कुमार ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण को अपना इस्तीफा सौंपने का दावा किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफा मिलने से इनकार कर दिया। दोनों के बयानों के बाद इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
उमेश कुमार ने एक दिन पहले विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने इसके पीछे विपक्ष के असहयोगात्मक रवैये को कारण बताते हुए आरोप लगाया कि जनहित, किसानों की समस्याओं और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
बुधवार को मीडिया से बातचीत में उमेश कुमार ने कहा कि वह विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं। हालांकि, जब विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण से इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने पत्र मिलने से इनकार कर दिया। ऐसे में फिलहाल उनके इस्तीफे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
विपक्ष के असहयोग से नाराजगी का दावा
उमेश कुमार ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में उन्होंने भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं और हरिद्वार क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि कई मौकों पर विपक्ष के साथ खड़े होने के बावजूद उन्हें जनहित के सवालों पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
विधायक के अनुसार, उन्होंने विधानसभा में विरोध प्रदर्शन से लेकर सदन के भीतर धरने तक विपक्ष का साथ दिया। लेकिन जब किसानों और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर प्रभावी आवाज उठाने की जरूरत पड़ी, तो उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्होंने जनहित के मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बताते हुए विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई।
इस्तीफा स्वीकार होने तक सदस्य रहेंगे विधायक
विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इस्तीफा मिलने से इनकार किए जाने के बाद अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया पर नजरें टिकी हैं। विधायक के इस्तीफे के मामले में उसकी प्राप्ति और स्वैच्छिकता व प्रामाणिकता की पुष्टि के बाद विधानसभा अध्यक्ष द्वारा निर्णय लिया जाना महत्वपूर्ण होता है। केवल इस्तीफे की घोषणा या पत्र सौंपने के दावे से विधानसभा की सदस्यता समाप्त नहीं होती।
उमेश कुमार के इस्तीफे की घोषणा को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, इस्तीफे को लेकर बनी स्थिति के बीच उनकी आगे की राजनीतिक रणनीति पर भी निगाहें रहेंगी।