नई दिल्ली/गाजियाबाद: भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु (passive euthanasia) की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा (32 वर्ष) का मंगलवार को दिल्ली के AIIMS में निधन हो गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद 11वें दिन शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली।
सूत्रों और अस्पताल से जुड़ी रिपोर्ट्स के अनुसार, हरीश राणा का निधन शाम करीब 4:10 बजे हुआ। वे 13 वर्षों से वेजिटेटिव स्टेट (स्थायी अचेत अवस्था) में थे और आर्टिफिशियल न्यूट्रिशन तथा हाइड्रेशन पर निर्भर थे।
घटना का संक्षिप्त इतिहास:
- अगस्त 2013 में चंडीगढ़ में पेिंग गेस्ट हाउस की चौथी मंजिल से गिरने के बाद हरीश को गंभीर सिर की चोट लगी थी।
- तब से वे पूरी तरह बिस्तर पर थे – 100% क्वाड्रिप्लेजिक और कोई जागरूकता नहीं।
- परिवार ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच) ने passive euthanasia की अनुमति दी और AIIMS में प्रक्रिया कराने का निर्देश दिया।
AIIMS में प्रक्रिया:
- 14 मार्च 2026 को उन्हें गाजियाबाद से AIIMS के पैलिएटिव केयर विभाग में भर्ती कराया गया।
- 16 मार्च से डॉक्टरों की विशेष टीम ने धीरे-धीरे आर्टिफिशियल न्यूट्रिशन और जीवन रक्षक सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया शुरू की।
- परिवार के सदस्यों ने भावुक विदाई दी थी – “सबको माफ करते हुए… अब जा बेटा, समय हो गया है।”
यह मामला “मरने का अधिकार (Right to Die with Dignity)” पर देशव्यापी बहस छेड़ गया। परिवार ने कहा कि यह फैसला सिर्फ उनके बेटे के लिए नहीं, बल्कि इसी स्थिति में फंस चुके हजारों अन्य मरीजों के लिए मिसाल बनेगा।