- खेमराज सुन्द्रियाल को कला के क्षेत्र में पदम् श्री मिला
- 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण तथा 113 पद्म श्री पुरस्कार
देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण देने की घोषणा की गई है। कोश्यारी समेत तीन पूर्व मुख्यमंत्री इस सम्मान से नवाजे गए हैं। इनमें झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन व केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया जा रहा है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी 131 लोगों की सूची में कोश्यारी का नाम सार्वजनिक जीवन के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए शामिल किया गया है। उत्तराखंड की राजनीति में ‘भगत दा’ के नाम से पहचाने जाने वाले कोश्यारी के लिए इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस पर होती है, जबकि सम्मान समारोह राष्ट्रपति भवन में मार्च-अप्रैल के बीच आयोजित किया जाता है।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई है. इसमें तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम भी शामिल हैं. केरल, असम, दिल्ली और उत्तराखंड के कुछ नेताओं का नाम भी इस सूची में है। भाजपा के कुछ नेताओं को भी सार्वजनिक जीवन में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पद्म सम्मान से नवाजा गया है केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन लेफ्ट पार्टी के बड़े नेता रहे हैं जबकि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यपाल रहे भगत सिंह कोश्यारी को भी उनकी सेवाओं के लिए यह सम्मान दिया गया है।
पद्म विभूषण विजेता
केरल के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन: माकपा के वरिष्ठ नेता रहे वीएस अच्युतानंदन वर्ष 2006 से 2011 तक केरल के मुख्यमंत्री रहे थे। 82 साल की उम्र में सीएम बनने वाले वो सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री थे। वो केरल में करीब 15 सालों तक नेता विपक्ष की भूमिका में भी रहे। अच्युतानंदन 1985 से जुलाई 2009 तक माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य भी रहे।
पद्म भूषण
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी: भगत सिंह कोश्यारी ने 2019 से 2023 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल की जिम्मेदारी निभाई। आरएसएस के साथ वो भाजपा से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। भगत सिंह कोश्यारी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष भी रहे। कोश्यारी 2001 से 2002 तक उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री भी थे। कोश्यारी 2002 से 2003 तक उत्तराखंड विधानसभा में नेता विपक्ष रहे।
झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन को भी मरणोपरांत पद्म पुरस्कार
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 और निधन 4 अगस्त 2025 को हुआ था। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता के साथ वो तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री भी रहे सोरेन तीन बार लोकसभा सांसद और फिर राज्यसभा सांसद रहे। संथाल जनजाति से ताल्लुक रखने वाले शिबू सोरेन तीन बार केंद्र सरकार में कोयला मंत्री भी रहे
दिल्ली के पूर्व सांसद और बीजेपी नेता वीके मल्होत्रा को भी मरणोपरांत पद्म भूषण
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे वीके मल्होत्रा का पूरा नाम विजय कुमार मल्होत्रा है.ब्रिटिश भारत में पंजाब प्रांत के लाहौर में जन्मे विजय कुमार मल्होत्रा के परिवार ने विभाजन के बाद दिल्ली को अपना घर बनाया मल्होत्रा दिल्ली सदर और साउथ दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद रहे। वो जनता पार्टी और फिर बीजेपी दिल्ली इकाई के अध्यक्ष भी रहे। केदार नाथ साहनी, मदन लाल खुराना के साथ कभी विजय कुमार मल्होत्रा की तिकड़ी का दिल्ली में काफी नाम था।
वेल्लापल्ली नतेशन का भी केरल से पद्मश्री पुरस्कार
कवींद्र पुरकायस्थ भी असम के बड़े नेता रहे हैं।
जानिए कोश्यारी के बारे में….
गरीब किसान परिवार में जन्म, सादगी पहचान
भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पलानाधुरा (चेताबगड़) गांव में हुआ। उनके पिता गोपाल सिंह कोश्यारी किसान थे और मां मोतिमा देवी गृहिणी थीं। परिवार की आजीविका खेती थी, इसलिए उनका शुरुआती जीवन आर्थिक तंगी में बीता। इसी माहौल में उनका स्वभाव सादगी और मेहनत वाला बनता चला गया।
अल्मोड़ा से BA और MA किया
कोश्यारी ने प्राथमिक शिक्षा महरगाड़ से ली। जूनियर हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए उन्हें घर से करीब 8 किलोमीटर दूर शामा जाना पड़ता था। हाईस्कूल कपकोट से और इंटर पिथौरागढ़ से किया। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अल्मोड़ा महाविद्यालय से BA और फिर अंग्रेजी में MA की पढ़ाई पूरी की।
शिक्षक बन पिथौरागढ़ को कर्मभूमि बनाया
MA करने के बाद भगत सिंह कोश्यारी 1964 में उत्तर प्रदेश के एटा जिले में राजा रामपुर इंटर कॉलेज में प्रवक्ता नियुक्त हुए। कुछ समय अध्यापन करने के बाद वे वापस पहाड़ लौट आए और पिथौरागढ़ को अपनी कर्मभूमि बना लिया। यही से उनका सामाजिक और राजनीतिक जुड़ाव और मजबूत हुआ।
1966 में भगत सिंह कोश्यारी RSS के संपर्क में आए और फिर संगठन से गहरे जुड़ गए। उन्होंने संघ की मजबूती के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वे RSS के प्रचारक भी रहे और लंबे समय तक संगठनात्मक काम करते रहे।
साल 1975 में कोश्यारी ने ‘पर्वत पीयूष’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादन और प्रकाशन का काम शुरू किया। उनके लेखन और संपादकीय में जनसमस्याओं को बेबाकी और निष्पक्षता से उठाने की बात कही जाती है। इस दौर में वे सीधे लोगों के मुद्दों से जुड़े रहे और जमीन पर उनकी पकड़ मजबूत होती गई।
उत्तराखंड राज्य निर्माण की मांग को लेकर उन्होंने ‘उत्तरांचल प्रदेश क्यों?’ नाम की पुस्तिका के जरिए राज्य स्थापना की मुहिम को आगे बढ़ाया। इसी समय उनका उत्तरांचल आंदोलन से जुड़ाव भी चर्चा में रहा। पहाड़ में उन्हें इसी वजह से लंबे समय से मजबूत नेता माना जाता रहा है।
आपातकाल में दो साल तक जेल
आपातकाल के दौर में भगत सिंह कोश्यारी को जेल भी जाना पड़ा। वे 3 जुलाई 1975 से 23 मार्च 1977 तक अल्मोड़ा और फतेहगढ़ जेल में बंद रहे। इस दौरान भी वे अपने साथियों के लिए प्रेरणा और हौसला बढ़ाने वाले व्यक्तित्व के रूप में सामने आते रहे।
1989 में लोकसभा चुनाव लड़ा
कोश्यारी ने छात्र राजनीति से अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की। 1989 में उन्होंने अल्मोड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार मिली। इसके बावजूद उन्होंने जनता से जुड़ाव बनाए रखा और लगातार सक्रिय राजनीति में बने रहे।
राजनीतिक सफर में वे विधान परिषद सदस्य बने और राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में मंत्री भी रहे। इसके बाद 2001 से 2002 तक वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और प्रदेश की कमान संभाली।
राज्यसभा व लोकसभा दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व किया
मुख्यमंत्री के बाद भी वे सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ते रहे। वे उत्तराखंड से 2008 से 2014 तक राज्यसभा सांसद रहे। इसके बाद 2014 में नैनीताल-उधमसिंह नगर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इससे उन्हें संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।
5 सितंबर 2019 को भगत सिंह कोश्यारी को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। बाद में उन्हें कुछ समय के लिए गोवा का अतिरिक्त प्रभार भी मिला। महाराष्ट्र में उनका कार्यकाल कई बार सुर्खियों में रहा, खासकर राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर उनके फैसले और सक्रियता लगातार चर्चा में रही।
भगतदा को खिचड़ी पसंद
उत्तराखंड की राजनीति में भगत सिंह कोश्यारी को प्यार से ‘भगतदा’ कहा जाता है। उनके करीबियों और परिचितों के मुताबिक उनकी सादगी का हर कोई कायल रहा है। उनका पसंदीदा भोजन खिचड़ी बताया जाता है, जो उनके साधारण जीवन और सादा स्वभाव की छवि को और मजबूत करता है।
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