देहरादून: जिला प्रशासन देहरादून ने एक बार फिर असहाय परिवार की मदद का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। पति और एक बेटी की मौत के बाद तीन अविवाहित बेटियों तथा पांच वर्षीय नातिन की जिम्मेदारी संभाल रही विधवा क्षमा परवीन का बैंक ऋण वन टाइम सेटलमेंट (OTS) के माध्यम से माफ करा दिया गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर ऋण निस्तारित कराया गया। बैंक द्वारा नो ड्यूज प्रमाण पत्र तथा एनओसी जारी कर दी गई है, जबकि शेष बकाया राशि 33 हजार रुपये जिला प्रशासन ने स्वयं बैंक में जमा करा दी।
क्षमा परवीन ने 28 मार्च 2026 को जिलाधिकारी सविन बंसल से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में अपनी बड़ी बेटी के विवाह के लिए डीसीबी बैंक से सवा लाख रुपये का ऋण लिया था। उसी वर्ष उनके पति का निधन हो गया, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ गया। इसके बाद वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी बड़ी विवाहित बेटी की भी मौत हो गई। इन दोहरी त्रासदियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण क्षमा परवीन शेष ऋण चुकाने में पूरी तरह असमर्थ हो गईं।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले का त्वरित संज्ञान लिया और बैंक से वन टाइम सेटलमेंट करवाया। सेटलमेंट के बाद बैंक ने एनओसी और नो ड्यूज प्रमाण पत्र जारी कर दिया। साथ ही शेष 33 हजार रुपये की राशि जिला प्रशासन द्वारा तुरंत जमा कराई गई।
शिक्षा संबंधी समस्याओं का भी समाधान किया गया। छोटी बेटी फैजा की स्कूल फीस 27 हजार रुपये नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट के तहत जमा कराई गई और उसकी शिक्षा पुनर्जीवित कर दी गई। मौके पर ही आय प्रमाण पत्र जारी कराया गया। पांच वर्षीय नातिन आयरा का आरटीई कोटे के तहत नजदीकी प्राइवेट स्कूल में दाखिला दिलाया गया। दाखिले में आ रही आय प्रमाण पत्र की अड़चन को भी तत्काल दूर कर दिया गया।
वर्तमान में क्षमा परवीन पर तीन अविवाहित बेटियों, एक पुत्र और पांच वर्षीय नातिन आयरा के भरण-पोषण तथा शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि जिला प्रशासन जरूरतमंद और असहाय नागरिकों की सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा ऐसे मानवीय प्रकरणों में प्राथमिकता के आधार पर त्वरित राहत प्रदान की जाएगी।
जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल से विधवा क्षमा परवीन और उनके परिवार पर राहत की नई किरण टिमटिमाई है।